हिंदी दिवस??

By Ruchi Roy

मुझे कोई समस्या नहीं रही ना कभी होगी अगर कोई किसी दिवस को celebrate कर रहा है। लेकिन हिंदी दिवस का मुझे कुछ ख़ास समझ नहीं आता औचित्य।

प्रेमचंद, अमृता प्रीतम, शिवानी, महादेवी, रेणु, जयशंकर जैसे लोगों कि किताबें पढ़ कर बड़ी हुई हूँ मैं, लेकिन उन किताबों में कहीं भी हिंदी ही एक मात्र भाषा है ऐसा कुछ पर्याय नहीं था।

उर्दू, मराठी, पंजाबी, पारसी, भोजपुरी, मैथिली और भी कई भाषावों में चीज़ें वर्णित की गयी हैं, मात्र हिंदी नहीं है।

कोई भी भाषा बड़ी या छोटी नहीं होती, कोई भी भाषा किसी साम्राज्य की निशानी नहीं होती।

आज हिंदी दिवस के आड़ में कहीं आप या मैं या आपके कोई नेतागण हिंदी को हिंद की भाषा बनाने कि माँग तो नहीं कर रहे ना?

हिंदी दिवस के आधे चहेते वर्तनी भी ठीक से नहीं लिख पा रहे और देश की भाषा की माँग कर रहे।

प्रेमचंद की किताबें anti national से कम नहीं लगेंगी लेकिन प्रेमचंद के नाम पर हिंदी दिवस ज़रूर मना लिया जाएगा।

राम नाम सत्य है सबका।

Leave a Reply

%d bloggers like this: